जनरल कैटेगरी के आर्थिक पिछड़ों (ईडब्ल्यूएस) को 10% आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच (5 जजों की बेंच) को रेफर किया जाएगा या नहीं, इस पर आज फैसला आएगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और बी आर गवई की बेंच दोपहर करीब 12 बजे इसका ऐलान करेगी। कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 को सुनवाई के बाद फैसला रिजर्व रख लिया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक आधार पर आरक्षण के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

पिटीशन लगाने वालों की क्या दलील?
ईडब्ल्यूएस को आरक्षण देने के केंद्र के फैसले के खिलाफ कई पिटीशन फाइल हुई थीं। जनहित अभियान और यूथ फॉर इक्विलिटी जैसे एनजीओ ने इसे चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि आर्थिक स्थिति को पूरी तरह रिजर्वेशन का आधार नहीं बनाया जा सकता। इससे कानून का उल्लंघन हुआ। साथ ही 1992 के इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि रिजर्वेशन की मैक्सिमम 50% लिमिट भी क्रॉस हो गई।

केंद्र ने क्या कहा था?
करीब 20 करोड़ गरीब परिवारों की सामाजिक तरक्की के लिए संविधान में बदलाव कर ईडब्ल्यूएस को रिजर्वेशन देने का फैसला किया गया। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में भी कहा गया है कि वाजिब वजह होने पर रिजर्वेशन की लिमिट 50% से ऊपर जा सकती है। तमिलनाडु में 68% तक रिजर्वेशन के फैसले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई।

सालाना 8 लाख से कम आय वालों को आर्थिक आधार पर आरक्षण
केंद्र सरकार ने सरकारी नौकरियों और हायर एजुकेशन के लिए एडमिशन में आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10% आरक्षण देने का फैसला किया था। इसके लिए परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम होने समेत कई शर्तें रखी गईं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 जनवरी 2019 को ईडब्ल्यूएस को आरक्षण लागू करने की मंजूरी दी थी।



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सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच में कम से कम 5 जज होते हैं। किसी केस को संविधान बेंच को रैफर करने का अधिकार चीफ जस्टिस के पास होता है। (फाइल फोटो)

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