ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में रहने वाली एंगेली बैसेट पति के साथ बैंक पहुंचीं, तो पता चला कि उनके खाते से 15 लाख रुपए निकालने की कोशिश की गई है। बैंक ने बताया कि उनकी पहचान और दस्तावेज वेरिफाई किए गए थे। इससे वे और उनके पति हैरान रह गए और बताया कि उन्होंने ये नहीं किया है।

इस पर पेमेंट तुरंत रोक दिया गया और वे धोखाधड़ी का शिकार होने से बच गए। लेकिन, ऑस्ट्रेलिया में एंगेली जैसे हजारों लोग हैं, जो इस फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। एंगेली के मुताबिक, उन्हें लगता है कि सरकार को और ज्यादा सावधान और सख्त होने की जरूरत है, क्योंकि यह पैसा हमारे बजाय सरकार का ही है।

सरकार ने गरीबों की मदद के लिए लॉन्च की योजना

दरअसल, सरकार ने कोरोना संकट के दौरान कमजोर हुई लोगों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्हें मदद देने की योजना लॉन्च की है। पैसा जल्द पहुंचे इसके लिए इसे फास्ट रिलीज सुपर एन्युएशन स्कीम शुरू की है। इसके तहत हर गरीब या जरूरतमंद को करीब 7.5 लाख रुपए दिए जा रहे हैं।

अपराधियों नेसरकारी वेबसाइट से मिलती-जुलती साइट्स बना ली

अपराधियों की नजर इन्हीं पैसों पर है, जिसके लिए वे नए-नए तरीके आजमा रहे हैं। इसकी खामियों का फायदा उठाकर वे करोड़ों रुपए उड़ा चुके हैं। उन्होंने सरकारी वेबसाइट से मिलती-जुलती साइट्स बना ली है, जिन पर लोग अपनी डिटेल्स शेयर करते हैं।

वे इन डिटेल्स का दुरुपयोग कर फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज बना लेेते हैं और पैसों के लिए आवेदन कर देते हैं। अकेले पर्थ में ये धोखेबाज करीब 150 लोगों को धोखा दे चुके हैं और हफ्ते भर में करीब 11.50 करोड़ रुपए चुरा चुके हैं।

सरकार का दावाःशिकायतों के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई

हालांकि, सरकार का दावा है कि शिकायतों के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। वेबसाइट पर दर्ज हो रहे खातों की संख्या सीमित कर दी गई है। लोगों के दस्तावेज कैसे चोरी हो रहे हैं इस पर गृह मंत्री पीटर डटन का कहना है कि हो सकता है कि टैक्स रिटर्न भरने के दौरान टैक्स एजेंसियों से ये जानकारी लीक या चोरी हुई हो।

पता चलने पर दो दिन स्कीम बंद की, पर चोरी जारी

एक टैक्स अधिकारी को शक होने के बाद धोखेबाजी पकड़ में आई। दरअसल, अपराधी सरकारी वेबसाइट से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर लोगों की जानकारी चुरा रहे हैं। बाद में उसका इस्तेमाल कर खाते से पैसे निकाल लेते हैं। सरकार ने दो दिन वेबसाइट बंद की फिर सुरक्षा बढ़ाने और सख्त कदम उठाने का दावा किया, लेकिन धोखाधड़ी रुक नहीं रही।



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अपराधी सरकारी वेबसाइट से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर लोगों की जानकारी चुरा रहे हैं। -प्रतीकात्मक फोटो

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